धाराओं से चुंबकीय क्षेत्र
एक गतिशील विद्युत आवेश अपने चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र बनाता है, इसलिए धारा ले जाने वाला कोई भी तार वृत्ताकार चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं से घिरा होता है। यदि आप उस तार को कुंडली में मोड़ें, तो हर फेरे की क्षेत्र रेखाएँ अंदर जुड़कर कुंडली की लंबाई में एक मज़बूत, समान क्षेत्र बनाती हैं। तार के अधिक फेरे लगाएँ, या उसमें अधिक धारा भेजें, तो अंदर का क्षेत्र मज़बूत हो जाता है।
B = μ₀ · N · I / L
- B — चुंबकीय क्षेत्र (T): कुंडली के अंदर चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता
- μ₀ — मुक्त आकाश की पारगम्यता (T·m/A): एक स्थिर स्थिरांक जो तय करता है कि धारा कितनी दृढ़ता से चुंबकीय क्षेत्र बनाती है
- N — फेरों की संख्या (turns): कुंडली में तार के कितने फेरे हैं
- I — धारा (A): तार से हर सेकंड कितना आवेश बहता है
- L — लंबाई (m): कुंडली की वह लंबाई जिस पर फेरे लपेटे गए हैं
एक कुंडली (सोलेनॉइड) में 0.5 मीटर लंबाई पर तार के 500 फेरे लपेटे गए हैं, जिसमें 2 एम्पियर धारा बहती है। अंदर चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता क्या है?
- N = 500 फेरे
- I = 2 A
- L = 0.5 m
- B = μ₀ · N · I / L
- B = (4π × 10⁻⁷ T·m/A) · 500 · 2 A / 0.5 m
B = 8π × 10⁻⁴ T